Thursday, April 15, 2010

फिरकती लड़कियों में

बोरियत से भरी गर्मियों की
उन तमाम बोझिल दोपहरों में
कुछ मिनटों की आराम तलब
झपकी लेने के बजाये
घंटों इंटरनेट पर
तुम्हे खोजता रहा.

गूगल की उस विशालकार
समुद्रीय टेक्नोलॉजी पर भी
तुम मुझे नहीं मिली.

और में कई दोपहरों में
की - बोर्ड पर
तुम्हारी आवाजें तलाशता रहा.

कई आईने बनाये
हजारों चहरें उलटता
और पलटता रहा रात भर.

सब्जियां खरीदती औरतों की
आँखें टटोली.

गलियों में और सड़कों पर
फिरकती लड़कियों की लम्बी, गेहुवां, गुलाबी
और कभी -कभी सांवली
टांगों को नापता रहा.

इमारतों में
रात के वक़्त
परदों के पीछे
गाउन से ढकीं
कमरों में टहलती
औरतों के सायों को ताकता रहा.

संवलाई चाँदनी में
खिड़कियों से बाहर झांकते 
परदों से लहराते
रात के परिंदों से उड़ते
उरोजों के अंदाज देखता रहा.

17 comments:

  1. fir wahi baat ki hum sab nature dwara abhishapt hain esa sochne....esa dekhne...esa feel karne ko...
    kavita na bhi likhi jaye.....soch ka to kuchh nahi kiya ja sakta na......fir jo kavita nahi likhte wo fir kavitanuma tasveeren banate hain......
    kya kiya jaye iss--"KAMBAKHT MAN KA"

    keep it up.

    ::awdhesh pratap singh

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  2. वो क्या था, जो तुम ढूँढ रहे थे, वो भी महिलाओं के आस पास ही। क्या आनंद, संतुष्टि। या कुछ और।

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  3. bahut sundar rachna

    acha laga pad kar

    shekhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/

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  4. bahut sundar rachna

    acha laga pad kar

    shekhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/

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  5. achi hai... par.. tumhare pyra se achha nahi hai...

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  6. वाह, बस कुछ भी बोलने के लायक नही.. :)

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  7. भाई, वर्ड वेरीफ़िकेशन हटा दे..कमेन्ट करने वालो को तकलीफ़ होती है..

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  8. गूगल की उस विशालकार
    समुद्रीय टेक्नोलॉजी पर भी
    तुम मुझे नहीं मिली.

    और में कई दोपहरों में
    की - बोर्ड पर
    तुम्हारी आवाजें तलाशता रहा.
    ....internet ki duniya se ru-b-ru karti aapki rachna kaabil-a-taarif hai......
    Computer ko madhyam banakar aaj kee samajik stithi ko bakhubi ujagar kiya hai aapne...
    badhai

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  9. Kavita achchi hai..Is bhagam-bhag wali zindagi me aapne kuch talashne ki koshish to ki...nahi to log apne aap se bhi bahar nahi nikal paate........aapki taalash puri ho..

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  10. me kya likhu kuch samjh nahi aa raha hai.bus itana hi kahna hai aapki talash aapki lekhni me humesha barkrar rahe or hume asa hi kuch acha pdneko milta rahe.

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  11. Thanks Navin.........

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  12. Bahot He acchi kavita hai

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  13. बड़ी ही सुन्दर और भावनात्मक प्रस्तुति है...विरह के भावो को शब्दों के माध्यम से अद्भुत तरीके से अभिव्यक्त किया है बधाई हो ...चन्द्र प्रकाश शर्मा

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  14. बड़ी ही सुन्दर और भावनात्मक प्रस्तुति है...विरह के भावो को शब्दों के माध्यम से अद्भुत तरीके से अभिव्यक्त किया है बधाई हो ...चन्द्र प्रकाश शर्मा

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